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mahabharat 6.26.31: क्षत्रिय होने के नाते अपने विशेष कर्तव्य को समझते हुए तुम्हें यह जान लेना चाहिए कि धर्म के लिए लड़ने से बढ़कर कोई कार्य नहीं है। इसलिए तुम्हें संकोच करने की कोई आवश्यकता नहीं है।   |   mahabharat अध्याय 6.26: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 2: गीता का सार   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.26.31 
स्वधर्ममपि चावेक्ष्य न विकम्पितुमर्हसि ।
धर्म्याद्धि युद्धाच्छ्रेयोऽन्यत्क्षत्रियस्य न विद्यते ॥ ३१ ॥
 
 
अनुवाद
क्षत्रिय होने के नाते अपने विशेष कर्तव्य को समझते हुए तुम्हें यह जान लेना चाहिए कि धर्म के लिए लड़ने से बढ़कर कोई कार्य नहीं है। इसलिए तुम्हें संकोच करने की कोई आवश्यकता नहीं है।
 
Considering your special duty as a Kshatriya, you should know that there is no work greater than fighting for Dharma. Hence, there is no need for you to hesitate.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)