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श्लोक  6.26.30 
देही नित्यमवध्योऽयं देहे सर्वस्य भारत ।
तस्मात्सर्वाणि भूतानि न त्वं शोचितुमर्हसि ॥ ३० ॥
 
 
अनुवाद
हे भरतवंशी! शरीर में स्थित प्राणी कभी नहीं मारा जा सकता। अतः तुम्हें किसी भी जीव के लिए शोक करने की आवश्यकता नहीं है।
 
O descendant of Bharata! A being residing in a body can never be killed. Therefore, you need not grieve for any living being.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)