श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 26: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 2: गीता का सार  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  6.26.23 
नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः ।
न चैनं क्ल‍ेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः ॥ २३ ॥
 
 
अनुवाद
इस आत्मा को न तो किसी शस्त्र से काटा जा सकता है, न अग्नि से जलाया जा सकता है, न जल में भिगोया जा सकता है और न वायु से सुखाया जा सकता है।
 
This soul can neither be cut into pieces by any weapon nor burnt by fire nor soaked in water nor dried by air.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas