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श्री महाभारत
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पर्व 6: भीष्म पर्व
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श्लोक 21
श्लोक
6.26.21
वेदाविनाशिनं नित्यं य एनमजमव्ययम् ।
कथं स पुरुषः पार्थ कं घातयति हन्ति कम् ॥ २१ ॥
अनुवाद
हे पार्थ! जो मनुष्य यह जानता है कि आत्मा अमर है, अजन्मा है, नित्य है, अविनाशी है, वह कैसे किसी को मार सकता है या मरवा सकता है?
O Parth! How can a person who knows that the soul is immortal, unborn, eternal and indestructible, kill or cause someone to be killed?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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