श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 26: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 2: गीता का सार  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  6.26.20 
न जायते म्रियते वा कदाचि-
न्नायं भूत्वा भविता वा न भूयः ।
अजो नित्यः शाश्वतोऽयं पुराणो
न हन्यते हन्यमाने शरीरे ॥ २० ॥
 
 
अनुवाद
आत्मा का न तो कभी जन्म होता है और न ही मृत्यु। वह न कभी जन्मी है, न कभी जन्म लेगी और न कभी जन्म लेगी। वह अजन्मा, नित्य, शाश्वत और पुरातन है। शरीर के मारे जाने पर भी वह नहीं मरती।
 
There is neither birth nor death for the soul at any time. It has never been born, nor is it born, nor will it be born. It is unborn, eternal, everlasting and ancient. It is not killed when the body is killed.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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