Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.26.19: जो यह सोचता है कि आत्मा को मारा जा सकता है और जो यह सोचता है कि वह मर चुकी है, वे दोनों ही अज्ञानी हैं, क्योंकि आत्मा न तो मारती है और न ही मारी जाती है। | mahabharat अध्याय 6.26: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2: गीता का सार । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
य एनं वेत्ति हन्तारं यश्चैनं मन्यते हतम् ।
उभौ तौ न विजानीतो नायं हन्ति न हन्यते ॥ १९ ॥
अनुवाद
जो यह सोचता है कि आत्मा को मारा जा सकता है और जो यह सोचता है कि वह मर चुकी है, वे दोनों ही अज्ञानी हैं, क्योंकि आत्मा न तो मारती है और न ही मारी जाती है।
He who thinks that the soul can be killed and he who thinks that it is dead, both are ignorant, because the soul neither kills nor is killed.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥