Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.26.13: जिस प्रकार इस (वर्तमान) शरीर में स्थित आत्मा बचपन से युवावस्था और फिर वृद्धावस्था की ओर निरन्तर अग्रसर होती है, उसी प्रकार मृत्यु के पश्चात् आत्मा दूसरे शरीर में चली जाती है। धैर्यवान व्यक्ति ऐसे परिवर्तनों के प्रति आसक्त नहीं होता। | mahabharat अध्याय 6.26: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2: गीता का सार । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
देहिनोऽस्मिन्यथा देहे कौमारं यौवनं जरा ।
तथा देहान्तरप्राप्तिर्धीरस्तत्र न मुह्यति ॥ १३ ॥
अनुवाद
जिस प्रकार इस (वर्तमान) शरीर में स्थित आत्मा बचपन से युवावस्था और फिर वृद्धावस्था की ओर निरन्तर अग्रसर होती है, उसी प्रकार मृत्यु के पश्चात् आत्मा दूसरे शरीर में चली जाती है। धैर्यवान व्यक्ति ऐसे परिवर्तनों के प्रति आसक्त नहीं होता।
Just as the embodied soul in this (present) body continuously progresses from childhood to youth and then to old age, similarly the soul goes into another body after death. A patient person does not get attached to such changes.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥