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श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 25: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 1: युद्धस्थल परीक्षण एवं अर्जुन विषाद योग  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  6.25.46 
सञ्जय उवाच
एवमुक्त्वार्जुनः संख्ये रथोपस्थ उपाविशत् ।
विसृज्य सशरं चापं शोकसंविग्न‍मानसः ॥ ४६ ॥
 
 
अनुवाद
संजय ने कहा: युद्धस्थल में ऐसा कहकर अर्जुन ने अपना धनुष-बाण एक ओर रख दिया और शोकग्रस्त मन से रथ के आसन पर बैठ गये।
 
Sanjaya said: Having said this on the battlefield, Arjuna put aside his bow and arrows and sat down on the seat of the chariot with a grief-stricken mind.
 
इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि श्रीमद्भगवद्‍गीतापर्वणि श्रीमद्भगवद्‍गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसंवादेऽर्जुनविषादयोगो नाम प्रथमोऽध्याय:॥ १॥ भीष्मपर्वणि तु पञ्चविंशोऽध्याय:*॥ २५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके श्रीमद्भगवद्‍गीतापर्वके अन्तर्गत ब्रह्मविद्या एवं योगशास्त्ररूप श्रीमद्भगवद्‍गीतोपनिषद्, श्रीकृष्णार्जुनसंवादमें अर्जुनविषादयोग नामक पहला अध्याय पूरा हुआ॥ १॥ भीष्मपर्वमें पचीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २५॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)