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संजय ने कहा: युद्धस्थल में ऐसा कहकर अर्जुन ने अपना धनुष-बाण एक ओर रख दिया और शोकग्रस्त मन से रथ के आसन पर बैठ गये।
Sanjaya said: Having said this on the battlefield, Arjuna put aside his bow and arrows and sat down on the seat of the chariot with a grief-stricken mind.
इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि श्रीमद्भगवद्गीतापर्वणि श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसंवादेऽर्जुनविषादयोगो नाम प्रथमोऽध्याय:॥ १॥ भीष्मपर्वणि तु पञ्चविंशोऽध्याय:*॥ २५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके श्रीमद्भगवद्गीतापर्वके अन्तर्गत ब्रह्मविद्या एवं योगशास्त्ररूप श्रीमद्भगवद्गीतोपनिषद्, श्रीकृष्णार्जुनसंवादमें अर्जुनविषादयोग नामक पहला अध्याय पूरा हुआ॥ १॥ भीष्मपर्वमें पचीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २५॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥