Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.25.41: अवांछित संतानों की वृद्धि निश्चित रूप से परिवार और कुल-परंपरा को नष्ट करने वालों के लिए नारकीय जीवन का निर्माण करती है। ऐसे पतित कुलों के पूर्वज (पितर लोग) इसलिए गिर जाते हैं क्योंकि उन्हें जल अर्पित करने और पिंडदान करने की रस्में समाप्त हो जाती हैं। | mahabharat अध्याय 6.25: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1: युद्धस्थल परीक्षण एवं अर्जुन विषाद योग । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अवांछित संतानों की वृद्धि निश्चित रूप से परिवार और कुल-परंपरा को नष्ट करने वालों के लिए नारकीय जीवन का निर्माण करती है। ऐसे पतित कुलों के पूर्वज (पितर लोग) इसलिए गिर जाते हैं क्योंकि उन्हें जल अर्पित करने और पिंडदान करने की रस्में समाप्त हो जाती हैं।
The increase in unwanted children certainly creates a hellish life for the family and for those who destroy the family tradition. The ancestors (Pitar Log) of such fallen clans fall because the rituals of offering water and pind daan to them come to an end.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥