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mahabharat 6.25.36: ऐसे अत्याचारियों का वध करने से हमें पाप लगेगा, इसलिए धृतराष्ट्र के पुत्रों और उनके मित्रों का वध करना उचित नहीं होगा। हे लक्ष्मीपति कृष्ण! इससे हमें क्या लाभ होगा? और अपने ही सगे-संबंधियों का वध करके हम सुखी कैसे हो सकते हैं?   |   mahabharat अध्याय 6.25: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 1: युद्धस्थल परीक्षण एवं अर्जुन विषाद योग   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.25.36 
पापमेवाश्रयेदस्मान्हत्वैतानाततायिनः ।
तस्मान्नार्हा वयं हन्तुं धार्तराष्ट्रान्सबान्धवान् ।
स्वजनं हि कथं हत्वा सुखिनः स्याम माधव ॥ ३६ ॥
 
 
अनुवाद
ऐसे अत्याचारियों का वध करने से हमें पाप लगेगा, इसलिए धृतराष्ट्र के पुत्रों और उनके मित्रों का वध करना उचित नहीं होगा। हे लक्ष्मीपति कृष्ण! इससे हमें क्या लाभ होगा? और अपने ही सगे-संबंधियों का वध करके हम सुखी कैसे हो सकते हैं?
 
If we kill such tyrants, we will incur sins, so it will not be right to kill the sons of Dhritarashtra and his friends. O Lakshmipati Krishna! What benefit will we get from this? And how can we be happy by killing our own relatives?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)