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श्लोक  6.25.31 
न च श्रेयोऽनुपश्यामि हत्वा स्वजनमाहवे ।
न काङ्क्षे विजयं कृष्ण न च राज्यं सुखानि च ॥ ३१ ॥
 
 
अनुवाद
हे कृष्ण! इस युद्ध में अपने ही सगे-संबंधियों को मारने में मुझे कोई लाभ नहीं दिखता, न ही मैं इससे कोई विजय, राज्य या सुख चाहता हूँ।
 
O Krishna! I see no good in killing my own relatives in this war, nor do I desire any victory, kingdom or happiness from it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)