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mahabharat 6.25.30: मैं अब यहाँ और खड़ा नहीं रह सकता। मैं स्वयं को भूल रहा हूँ और मेरा सिर घूम रहा है। हे कृष्ण! मुझे केवल बुराई के कारण ही दिखाई दे रहे हैं।   |   mahabharat अध्याय 6.25: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 1: युद्धस्थल परीक्षण एवं अर्जुन विषाद योग   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.25.30 
न च शक्न‍ोम्यवस्थातुं भ्रमतीव च मे मनः ।
निमित्तानि च पश्यामि विपरीतानि केशव ॥ ३० ॥
 
 
अनुवाद
मैं अब यहाँ और खड़ा नहीं रह सकता। मैं स्वयं को भूल रहा हूँ और मेरा सिर घूम रहा है। हे कृष्ण! मुझे केवल बुराई के कारण ही दिखाई दे रहे हैं।
 
I am unable to stand here any longer. I am forgetting myself and my head is spinning. O Krishna! I can only see the causes of evil.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)