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mahabharat 6.25.29: मेरा पूरा शरीर कांप रहा है, मेरे रोंगटे खड़े हो गए हैं, मेरा गांडीव धनुष मेरे हाथ से फिसल रहा है और मेरी त्वचा जल रही है।   |   mahabharat अध्याय 6.25: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 1: युद्धस्थल परीक्षण एवं अर्जुन विषाद योग   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 25: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 1: युद्धस्थल परीक्षण एवं अर्जुन विषाद योग  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  6.25.29 
वेपथुश्च शरीरे मे रोमहर्षश्च जायते ।
गाण्डीवं स्रंसते हस्तात्त्वक्च‍ैव परिदह्यते ॥ २९ ॥
 
 
अनुवाद
मेरा पूरा शरीर कांप रहा है, मेरे रोंगटे खड़े हो गए हैं, मेरा गांडीव धनुष मेरे हाथ से फिसल रहा है और मेरी त्वचा जल रही है।
 
My whole body is shaking, my hair is standing on end, my Gandiva bow is slipping from my hand and my skin is burning.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)