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श्लोक  6.25.1 
धृतराष्ट्र उवाच
धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सव: ।
मामका: पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय ॥ १ ॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र बोले, "हे संजय! मेरे और पाण्डु के पुत्र जब युद्ध की इच्छा से पवित्र कुरुक्षेत्र भूमि में एकत्र हुए, तो उन्होंने क्या किया?
 
Dhritarashtra said, "O Sanjaya! What did my and Pandu's sons do when they gathered in the holy land of Kurukshetra with the desire to fight?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)