अन्योन्यं वीक्षमाणानां योधानां भरतर्षभ।
कुञ्जराणां च नदतां सैन्यानां च प्रहृष्यताम्॥ ७॥
अनुवाद
हे भारतभूषण! एक-दूसरे को देखते हुए योद्धाओं का कोलाहल, हाथियों का गरजना और हर्ष से भरी हुई सेनाओं का कोलाहल सर्वत्र फैल रहा था।
O Bharatbhushan! The tumultuous noise of the warriors looking at each other, the roaring elephants and the armies filled with joy was spreading everywhere. 7.
इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि श्रीमद्भगवद्गीतापर्वणि धृतराष्ट्रसंजयसंवादे चतुर्विंशोऽध्याय:॥ २४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत श्रीमद्भगवद्गीतापर्वमें धृतराष्ट्र-संजय-संवादविषयक चौबीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २४॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥