श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 24: सैनिकोंके हर्ष और उत्साहके विषयमें धृतराष्ट्र और संजयका संवाद  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  6.24.3 
कस्य सेनासमुदये गन्धमाल्यसमुद्भव:।
वाच: प्रदक्षिणाश्चैव योधानामभिगर्जताम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
किसकी सेनाओं में सुगन्धित पुष्पमालाएँ थीं? किसकी गर्जना करने वाले योद्धाओं की वाणी उदार और उत्साह से भरी हुई थी?॥3॥
 
In whose armies were there fragrant garlands of flowers? Whose roaring warriors' voices were generous and full of enthusiasm?॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)