श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 23: अर्जुनके द्वारा दुर्गादेवीकी स्तुति, वरप्राप्ति और अर्जुनकृत दुर्गास्तवनके पाठकी महिमा  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  6.23.27 
प्राप्तकालमिदं वाक्यं कालपाशेन गुण्ठिता:।
द्वैपायनो नारदश्च कण्वो रामस्तथानघ:।
अवारयंस्तव सुतं न चासौ तद् गृहीतवान्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
कालपाश से बँधे होने के कारण वे इस समयोचित बात को कहने पर भी नहीं सुनते। द्वैपायन व्यास, नारद, कण्व और निष्पाप परशुराम ने आपके पुत्र को बहुत रोका था; परन्तु उसने उनकी बात नहीं मानी॥27॥
 
Due to being bound by the time loop, they do not listen to this timely matter even when told. Dwaipayana Vyas, Narad, Kanva and sinless Parashurama had prevented your son a lot; But he did not listen to them. 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)