श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 23: अर्जुनके द्वारा दुर्गादेवीकी स्तुति, वरप्राप्ति और अर्जुनकृत दुर्गास्तवनके पाठकी महिमा  »  श्लोक 21-22h
 
 
श्लोक  6.23.21-22h 
य इदं पठते स्तोत्रं कल्य उत्थाय मानव:॥ २१॥
यक्षरक्ष:पिशाचेभ्यो न भयं विद्यते सदा।
 
 
अनुवाद
जो व्यक्ति प्रातःकाल उठकर इस स्तोत्र का पाठ करता है, उसे यक्ष, राक्षस और भूत-प्रेत का कभी भय नहीं रहता।
 
The person who wakes up early in the morning and recites this hymn is never afraid of yakshas, ​​demons and ghosts. 21/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)