श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 23: अर्जुनके द्वारा दुर्गादेवीकी स्तुति, वरप्राप्ति और अर्जुनकृत दुर्गास्तवनके पाठकी महिमा  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  6.23.17 
संजय उवाच
तत: पार्थस्य विज्ञाय भक्तिं मानववत्सला।
अन्तरिक्षगतोवाच गोविन्दस्याग्रत: स्थिता॥ १७॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं- राजन! अर्जुन की इस भक्ति का अनुभव करके मनुष्यों में स्नेह रखने वाली माता दुर्गा अन्तरिक्ष में भगवान श्रीकृष्ण के सामने आकर खड़ी हो गईं और इस प्रकार बोलीं॥17॥
 
Sanjay says- Rajan! After experiencing this devotion of Arjuna, Mother Durga, who has affection towards humans, came and stood in front of Lord Shri Krishna in space and spoke thus. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)