श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 23: अर्जुनके द्वारा दुर्गादेवीकी स्तुति, वरप्राप्ति और अर्जुनकृत दुर्गास्तवनके पाठकी महिमा  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  6.23.16 
तुष्टि: पुष्टिर्धृतिर्दीप्तिश्चन्द्रादित्यविवर्धिनी।
भूतिर्भूतिमतां सङ्खॺे वीक्ष्यसे सिद्धचारणै:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
आप ही संतोष, पुष्टि, स्थिरता देने वाले और सूर्य-चन्द्रमा को बढ़ाने वाले प्रकाश भी हैं। आप ही धन के स्वरूप हैं। सिद्ध और भाट रणभूमि में आपका दर्शन करते हैं। 16॥
 
You are also the light that gives satisfaction, confirmation, stability and increases the sun and moon. You are the embodiment of wealth. Siddhas and bards see you in the battlefield. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)