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mahabharat 6.23.13: महादेवी! मैंने शुद्ध हृदय से आपकी स्तुति की है। आपकी कृपा से मैं इस रणभूमि में सदैव विजयी रहूँ। 13॥   |   mahabharat अध्याय 6.23: अर्जुनके द्वारा दुर्गादेवीकी स्तुति, वरप्राप्ति और अर्जुनकृत दुर्गास्तवनके पाठकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 23: अर्जुनके द्वारा दुर्गादेवीकी स्तुति, वरप्राप्ति और अर्जुनकृत दुर्गास्तवनके पाठकी महिमा  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  6.23.13 
स्तुतासि त्वं महादेवि विशुद्धेनान्तरात्मना।
जयो भवतु मे नित्यं त्वत्प्रसादाद् रणाजिरे॥ १३॥
 
 
अनुवाद
महादेवी! मैंने शुद्ध हृदय से आपकी स्तुति की है। आपकी कृपा से मैं इस रणभूमि में सदैव विजयी रहूँ। 13॥
 
Mahadevi! I have praised you with a pure heart. By your grace, may I always be victorious in this battlefield. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)