श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 23: अर्जुनके द्वारा दुर्गादेवीकी स्तुति, वरप्राप्ति और अर्जुनकृत दुर्गास्तवनके पाठकी महिमा  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  6.23.12 
स्वाहाकार: स्वधा चैव कला काष्ठा सरस्वती।
सावित्रि वेदमाता च तथा वेदान्त उच्यते॥ १२॥
 
 
अनुवाद
सवित्रि! स्वाहा, स्वधा, कला, काष्ठा, सरस्वती, वेदमाता और वेदांत- ये सभी आपके ही नाम हैं। 12॥
 
Savitri! Swaha, Swadha, Kala, Kashtha, Saraswati, Vedamata and Vedanta – all these are your names. 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)