श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 23: अर्जुनके द्वारा दुर्गादेवीकी स्तुति, वरप्राप्ति और अर्जुनकृत दुर्गास्तवनके पाठकी महिमा  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  6.23.10 
वेदश्रुति महापुण्ये ब्रह्मण्ये जातवेदसि।
जम्बूकटकचैत्येषु नित्यं सन्निहितालये॥ १०॥
 
 
अनुवाद
आप वेदों के शास्त्र हैं, आपका स्वरूप अत्यंत निर्मल है; वेद और ब्राह्मण आपको प्रिय हैं; आप जातवेद अग्नि की शक्ति हैं; जम्बू, कटक और चैत्य वृक्षों में आपका नित्य निवास है॥10॥
 
You are the scriptures of the Vedas, your form is very pure; Vedas and Brahmins are dear to you. You are the power of Jatveda Agni; Your daily residence is in Jambu, Cuttack and Chaitya trees. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)