श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 22: युधिष्ठिरकी रणयात्रा, अर्जुन और भीमसेनकी प्रशंसा तथा श्रीकृष्णका अर्जुनसे कौरवसेनाको मारनेके लिये कहना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  6.22.7 
पुरोहिता: शत्रुवधं वदन्तो
ब्रह्मर्षिसिद्धा: श्रुतवन्त एनम्।
जप्यैश्च मन्त्रैश्च महौषधीभि:
समन्तत: स्वस्त्ययनं ब्रुवन्त:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
शास्त्रों के ज्ञाता पुरोहित, ब्रह्मऋषि और सिद्ध पुरुष जप, मंत्र और उत्तम औषधियों के द्वारा युधिष्ठिर के कल्याण और शत्रुओं के नाश के लिए सब ओर से शुभ आशीर्वाद देने लगे॥7॥
 
Priests, Brahmarishis and Siddhas who were scholars of the scriptures started giving auspicious blessings from all sides for the welfare of Yudhishthira and the destruction of his enemies through chanting, mantras and good medicines. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)