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mahabharat 6.22.16: जैसे मेघ तेजस्वी सूर्य को ढक लेते हैं, वैसे ही ये समस्त सेनाएँ इन महाबली भीष्म को ढक रही हैं। हे वीर अर्जुन! पहले इन सेनाओं का संहार करो और फिर भरतवंशी भीष्मजी से युद्ध की इच्छा करो॥ 16॥   |   mahabharat अध्याय 6.22: युधिष्ठिरकी रणयात्रा, अर्जुन और भीमसेनकी प्रशंसा तथा श्रीकृष्णका अर्जुनसे कौरवसेनाको मारनेके लिये कहना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 22: युधिष्ठिरकी रणयात्रा, अर्जुन और भीमसेनकी प्रशंसा तथा श्रीकृष्णका अर्जुनसे कौरवसेनाको मारनेके लिये कहना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  6.22.16 
एतान्यनीकानि महानुभावं
गूहन्ति मेघा इव रश्मिमन्तम्।
एतानि हत्वा पुरुषप्रवीर
काङ्क्षस्व युद्धं भरतर्षभेण॥ १६॥
 
 
अनुवाद
जैसे मेघ तेजस्वी सूर्य को ढक लेते हैं, वैसे ही ये समस्त सेनाएँ इन महाबली भीष्म को ढक रही हैं। हे वीर अर्जुन! पहले इन सेनाओं का संहार करो और फिर भरतवंशी भीष्मजी से युद्ध की इच्छा करो॥ 16॥
 
Just as clouds cover the bright sun, similarly all these armies are covering this great Bhishma. Brave Arjun! First kill these armies and then aspire for a battle with the jewel of the Bharata clan, Bhishmaji.॥ 16॥
 
इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि श्रीमद्भगवद्‍गीतापर्वणि श्रीकृष्णार्जुनसंवादे द्वाविंशोऽध्याय:॥ २२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत श्रीमद्भगवद्‍गीतापर्वमें श्रीकृष्ण और अर्जुनका संवादविषयक बाईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २२॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)