श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 22: युधिष्ठिरकी रणयात्रा, अर्जुन और भीमसेनकी प्रशंसा तथा श्रीकृष्णका अर्जुनसे कौरवसेनाको मारनेके लिये कहना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  6.22.15 
वासुदेव उवाच
य एष रोषात् प्रतपन् बलस्थो
यो न: सेनां सिंह इवेक्षते च।
स एष भीष्म: कुरुवंशकेतु-
र्येनाहृतास्त्रिशतं वाजिमेधा:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
भगवान वसुदेव बोले, 'धनंजय! जो अपनी सेना के मध्य में बैठे हुए क्रोध से जल रहे हैं और सिंह की भाँति हमारी सेना को देख रहे हैं, वे कुरुवंशी भीष्म ही हैं, जिन्होंने अब तक तीन सौ अश्वमेध यज्ञ किये हैं।'
 
Lord Vasudeva said, 'Dhananjaya! The one who is sitting in the middle of his army and is burning with anger and is looking at our army like a lion is the same Bhishma of the Kuru clan, who has performed three hundred Ashwamedha Yajnas till now.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)