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mahabharat 6.22.14: उस समय सेना के मध्य में खड़े हुए वीर और निद्रा को जीतने वाले भरत नामक महारथी राजकुमार अर्जुन से भगवान श्रीकृष्ण इस प्रकार बोले॥14॥   |   mahabharat अध्याय 6.22: युधिष्ठिरकी रणयात्रा, अर्जुन और भीमसेनकी प्रशंसा तथा श्रीकृष्णका अर्जुनसे कौरवसेनाको मारनेके लिये कहना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 22: युधिष्ठिरकी रणयात्रा, अर्जुन और भीमसेनकी प्रशंसा तथा श्रीकृष्णका अर्जुनसे कौरवसेनाको मारनेके लिये कहना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  6.22.14 
अनीकमध्ये तिष्ठन्तं राजपुत्रं दुरासदम्।
अब्रवीद् भरतश्रेष्ठं गुडाकेशं जनार्दन:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
उस समय सेना के मध्य में खड़े हुए वीर और निद्रा को जीतने वाले भरत नामक महारथी राजकुमार अर्जुन से भगवान श्रीकृष्ण इस प्रकार बोले॥14॥
 
At that time, Lord Shri Krishna spoke thus to the great prince Arjuna, the brave and sleep-conquering Bharat, who was standing in the middle of the army. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)