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mahabharat 6.22.11: महाराज! जो सुन्दर भुजाओं वाले भीमसेन युद्ध में बिना किसी अस्त्र के ही अपनी भुजाओं से मनुष्यों, घोड़ों और हाथियों को नष्ट कर सकते हैं, वे आपके पुत्रों की सेना का नाश करने के लिए अत्यन्त भयंकर रूप धारण कर चुके हैं॥11॥   |   mahabharat अध्याय 6.22: युधिष्ठिरकी रणयात्रा, अर्जुन और भीमसेनकी प्रशंसा तथा श्रीकृष्णका अर्जुनसे कौरवसेनाको मारनेके लिये कहना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 22: युधिष्ठिरकी रणयात्रा, अर्जुन और भीमसेनकी प्रशंसा तथा श्रीकृष्णका अर्जुनसे कौरवसेनाको मारनेके लिये कहना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  6.22.11 
उद्वर्तयिष्यंस्तव पुत्रसेना-
मतीव रौद्रं स बिभर्ति रूपम्।
अनायुधो य: सुभुजो भुजाभ्यां
नराश्वनागान् युधि भस्म कुर्यात्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
महाराज! जो सुन्दर भुजाओं वाले भीमसेन युद्ध में बिना किसी अस्त्र के ही अपनी भुजाओं से मनुष्यों, घोड़ों और हाथियों को नष्ट कर सकते हैं, वे आपके पुत्रों की सेना का नाश करने के लिए अत्यन्त भयंकर रूप धारण कर चुके हैं॥11॥
 
Maharaj! The beautiful-armed Bhimasena who can destroy men, horses and elephants in battle without any weapons just with his arms has assumed a very fierce form to destroy the army of your sons. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)