Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 6.22.10: उस रथ पर कपिध्वज अर्जुन हाथ में गाण्डीव धनुष और बाण लिए हुए सवार थे। भगवान श्रीकृष्ण ने उसका संचालन किया था। इस पृथ्वी पर अर्जुन के समान कोई धनुर्धर न हुआ है और न होगा। 10॥   |   mahabharat अध्याय 6.22: युधिष्ठिरकी रणयात्रा, अर्जुन और भीमसेनकी प्रशंसा तथा श्रीकृष्णका अर्जुनसे कौरवसेनाको मारनेके लिये कहना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 22: युधिष्ठिरकी रणयात्रा, अर्जुन और भीमसेनकी प्रशंसा तथा श्रीकृष्णका अर्जुनसे कौरवसेनाको मारनेके लिये कहना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  6.22.10 
तमास्थित: केशवसंगृहीतं
कपिध्वजो गाण्डिवबाणपाणि:।
धनुर्धरो यस्य सम: पृथिव्यां
न विद्यते नो भविता कदाचित्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
उस रथ पर कपिध्वज अर्जुन हाथ में गाण्डीव धनुष और बाण लिए हुए सवार थे। भगवान श्रीकृष्ण ने उसका संचालन किया था। इस पृथ्वी पर अर्जुन के समान कोई धनुर्धर न हुआ है और न होगा। 10॥
 
Kapidhwaja Arjuna was riding on that chariot with Gandiva bow and arrow in his hand. Lord Shri Krishna had taken charge of it. There is no archer like Arjun on this earth nor will there be. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)