श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 21: कौरवसेनाको देखकर युधिष्ठिरका विषाद करना और ‘श्रीकृष्णकी कृपासे ही विजय होती है’ यह कहकर अर्जुनका उन्हें आश्वासन देना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  6.21.17 
तस्य ते न व्यथां काञ्चिदिह पश्यामि भारत।
यस्य ते जयमाशास्ते विश्वभुक् त्रिदिवेश्वर:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
अतः हे भारत! मैं तुम्हें दुःखी या चिंतित होने का कोई कारण नहीं देखता; क्योंकि परमेश्वर और पुरुषोत्तम भगवान श्रीकृष्ण तुम्हारी विजय की आशा रखते हैं॥17॥
 
‘Therefore, Bharata! I do not see any reason for you to be sad or worried; because the Supreme Lord and the Supreme Being, Lord Krishna, hopes for your victory.’॥ 17॥
 
इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि श्रीमद्भगवद्‍गीतापर्वणि युधिष्ठिरार्जुनसंवादे एकविंशोऽध्याय:॥ २१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत श्रीमद्भगवद्‍गीतापर्वमें युधिष्ठिर-अर्जुनसंवादविषयक इक्कीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २१॥

 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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