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श्लोक 6.21.11  |
त्यक्त्वाधर्मं च लोभं च मोहं चोद्यममास्थिता:।
युद्धॺध्वमनहंकारा यतो धर्मस्ततो जय:॥ ११॥ |
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| अनुवाद |
| हे देवताओं! पाप, लोभ और मोह का परित्याग करके अहंकाररहित होकर उद्यम के बल से युद्ध करो। जिस पक्ष में पुण्य है, वही विजयी है।॥11॥ |
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| ‘O Gods! Give up sin, greed and delusion and fight with the help of enterprise without any ego. The side where there is virtue is victorious.’॥ 11॥ |
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