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mahabharat 6.20.8: उसके सिर पर चन्द्रमा के समान चमकता हुआ श्वेत छत्र और गले में स्वर्ण की माला शोभायमान थी। गंधार देश के पर्वतीय योद्धाओं के साथ गंधार नरेश शकुनि आये और दुर्योधन को चारों ओर से घेर लिया।   |   mahabharat अध्याय 6.20: दोनों सेनाओंकी स्थिति तथा कौरवसेनाका अभियान   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 20: दोनों सेनाओंकी स्थिति तथा कौरवसेनाका अभियान  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  6.20.8 
चन्द्रप्रभं श्वेतमथातपत्रं
सौवर्णस्रग् भ्राजति चोत्तमाङ्गे।
तं सर्वत: शकुनि: पर्वतीयै:
सार्धं गान्धारैर्याति गान्धारराज:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
उसके सिर पर चन्द्रमा के समान चमकता हुआ श्वेत छत्र और गले में स्वर्ण की माला शोभायमान थी। गंधार देश के पर्वतीय योद्धाओं के साथ गंधार नरेश शकुनि आये और दुर्योधन को चारों ओर से घेर लिया।
 
A white umbrella shining like the moon was held over his head and a golden garland adorned his neck. King Shakuni of Gandhar came along with the mountain warriors of Gandhar country and was surrounding Duryodhan from all sides.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)