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श्लोक  6.20.4 
उभे सेने बृहत्यौ भीमरूपे
तथैवोभे भारत दुर्विषह्ये।
तथैवोभे स्वर्गजयाय सृष्टे
तथैवोभे सत्पुरुषोपजुष्टे॥ ४॥
 
 
अनुवाद
भारत! दोनों ओर की सेनाएँ विशाल, भयंकर और असह्य थीं, मानो विधाता ने स्वर्ग प्राप्ति के लिए ही दोनों सेनाओं का निर्माण किया हो। दोनों ही सेनाएँ सत्पुरुषों से परिपूर्ण थीं।
 
Bharat! The armies on both sides were huge, fierce and unbearable, as if the creator had created both the armies to attain heaven. Both were full of good men. 4.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)