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mahabharat 6.2.30: हे भारत! दोनों संध्याएँ अग्नि से भरी हुई प्रतीत होती हैं। मेघ धूल और मांस की वर्षा करते हैं। 30।   |   mahabharat अध्याय 6.2: वेदव्यासजीके द्वारा संजयको दिव्य दृष्टिका दान तथा भयसूचक उत्पातोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.2.30 
उभे संध्ये प्रकाशेते दिशां दाहसमन्विते।
पर्जन्य: पांसुवर्षी च मांसवर्षी च भारत॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
हे भारत! दोनों संध्याएँ अग्नि से भरी हुई प्रतीत होती हैं। मेघ धूल और मांस की वर्षा करते हैं। 30।
 
‘Both the evenings appear to be full of fire. O Bharata! The clouds rain dust and flesh. 30.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)