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mahabharat 6.2.18-19: ये पक्षी अत्यन्त प्रसन्न होकर युद्धभूमि को निकट से देखने आते हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि मांसाहारी पशु-पक्षी हाथी-घोड़ों का मांस खाएँगे। भय उत्पन्न करने वाले कंक पक्षी कठोर वाणी बोलते हुए सेना के बीच से होते हुए दक्षिण दिशा की ओर जाते हैं।॥18-19॥   |   mahabharat अध्याय 6.2: वेदव्यासजीके द्वारा संजयको दिव्य दृष्टिका दान तथा भयसूचक उत्पातोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 2: वेदव्यासजीके द्वारा संजयको दिव्य दृष्टिका दान तथा भयसूचक उत्पातोंका वर्णन  »  श्लोक 18-19
 
 
श्लोक  6.2.18-19 
अभ्यग्रं च प्रपश्यन्ति युद्धमानन्दिनो द्विजा:।
क्रव्यादा भक्षयिष्यन्ति मांसानि गजवाजिनाम्॥ १८॥
निर्दयं चाभिवाशन्तो भैरवा भयवेदिन:।
कङ्का: प्रयान्ति मध्येन दक्षिणामभितो दिशम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
ये पक्षी अत्यन्त प्रसन्न होकर युद्धभूमि को निकट से देखने आते हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि मांसाहारी पशु-पक्षी हाथी-घोड़ों का मांस खाएँगे। भय उत्पन्न करने वाले कंक पक्षी कठोर वाणी बोलते हुए सेना के बीच से होते हुए दक्षिण दिशा की ओर जाते हैं।॥18-19॥
 
‘These birds, being very happy, come and watch the battlefield from very close. This indicates that carnivorous animals and birds will eat the flesh of elephants and horses. The Kank birds, which convey fear, go towards the south through the army while speaking in a harsh voice.॥ 18-19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)