श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 2: वेदव्यासजीके द्वारा संजयको दिव्य दृष्टिका दान तथा भयसूचक उत्पातोंका वर्णन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  6.2.14 
दिष्टमेतन्नरव्याघ्र नाभिशोचितुमर्हसि।
न चैव शक्यं संयन्तुं यतो धर्मस्ततो जय:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषश्रेष्ठ! यह ईश्वर का विधान है। इसे कोई मिटा नहीं सकता। इसलिए तुम्हें इसके लिए शोक नहीं करना चाहिए। जहाँ धर्म होगा, वहीं विजय होगी।॥14॥
 
‘O best of men! This is the law of God. No one can erase it. Therefore you should not grieve for this. Wherever there is Dharma, that side will be victorious.’॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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