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mahabharat 6.2.11: चाहे कोई वस्तु दृश्य हो या अदृश्य, दिन में हो या रात में, अथवा मन में भी उसका विचार किया जाता हो, संजय यह सब जान लेगा॥ 11॥   |   mahabharat अध्याय 6.2: वेदव्यासजीके द्वारा संजयको दिव्य दृष्टिका दान तथा भयसूचक उत्पातोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 2: वेदव्यासजीके द्वारा संजयको दिव्य दृष्टिका दान तथा भयसूचक उत्पातोंका वर्णन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  6.2.11 
प्रकाशं वाप्रकाशं वा दिवा वा यदि वा निशि।
मनसा चिन्तितमपि सर्वं वेत्स्यति संजय:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
चाहे कोई वस्तु दृश्य हो या अदृश्य, दिन में हो या रात में, अथवा मन में भी उसका विचार किया जाता हो, संजय यह सब जान लेगा॥ 11॥
 
Whether something is visible or invisible, occurs during the day or night, or is even thought of in the mind, Sanjaya will know it all.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)