vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 6: भीष्म पर्व
»
अध्याय 2: वेदव्यासजीके द्वारा संजयको दिव्य दृष्टिका दान तथा भयसूचक उत्पातोंका वर्णन
»
श्लोक 11
श्लोक
6.2.11
प्रकाशं वाप्रकाशं वा दिवा वा यदि वा निशि।
मनसा चिन्तितमपि सर्वं वेत्स्यति संजय:॥ ११॥
अनुवाद
चाहे कोई वस्तु दृश्य हो या अदृश्य, दिन में हो या रात में, अथवा मन में भी उसका विचार किया जाता हो, संजय यह सब जान लेगा॥ 11॥
Whether something is visible or invisible, occurs during the day or night, or is even thought of in the mind, Sanjaya will know it all.॥ 11॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd