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mahabharat 6.2.1-3: वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय ! तत्पश्चात पूर्व और पश्चिम दिशा में दोनों ओर की सेनाओं को आमने-सामने खड़ा देखकर, समस्त वेदवेत्ताओं में श्रेष्ठ, भूत, भविष्य और वर्तमान को जानने वाले, तथा होने वाले भयंकर युद्ध का भावी परिणाम प्रत्यक्ष देखने वाले, महामुनि सत्यवतीनन्दन महर्षि भगवान व्यास राजा धृतराष्ट्र के पास आये। उस समय वे अपने पुत्रों के साथ हुए अन्याय को सोचकर दुःखी होकर रो रहे थे। व्यासजी ने उनसे एकान्त में कहा ॥1-3॥   |   mahabharat अध्याय 6.2: वेदव्यासजीके द्वारा संजयको दिव्य दृष्टिका दान तथा भयसूचक उत्पातोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 2: वेदव्यासजीके द्वारा संजयको दिव्य दृष्टिका दान तथा भयसूचक उत्पातोंका वर्णन  »  श्लोक 1-3
 
 
श्लोक  6.2.1-3 
वैशम्पायन उवाच
तत: पूर्वापरे सैन्ये समीक्ष्य भगवानृषि:।
सर्ववेदविदां श्रेष्ठो व्यास: सत्यवतीसुत:॥ १॥
भविष्यति रणे घोरे भरतानां पितामह:।
प्रत्यक्षदर्शी भगवान‍् भूतभव्यभविष्यवित्॥ २॥
वैचित्रवीर्यं राजानं स रहस्यब्रवीदिदम्।
शोचन्तमार्तं ध्यायन्तं पुत्राणामनयं तदा॥ ३॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय ! तत्पश्चात पूर्व और पश्चिम दिशा में दोनों ओर की सेनाओं को आमने-सामने खड़ा देखकर, समस्त वेदवेत्ताओं में श्रेष्ठ, भूत, भविष्य और वर्तमान को जानने वाले, तथा होने वाले भयंकर युद्ध का भावी परिणाम प्रत्यक्ष देखने वाले, महामुनि सत्यवतीनन्दन महर्षि भगवान व्यास राजा धृतराष्ट्र के पास आये। उस समय वे अपने पुत्रों के साथ हुए अन्याय को सोचकर दुःखी होकर रो रहे थे। व्यासजी ने उनसे एकान्त में कहा ॥1-3॥
 
Vaishampayanji says – Janamejaya! Thereafter, seeing the armies of both the sides standing face to face in the east and west, the great sage Satyavatinandan Maharishi Lord Vyas, the best among all the Veda scholars, having knowledge of the past, future and present, who was directly seeing the future outcome of the fierce battle that was about to take place, came to King Dhritarashtra. At that time, he was feeling sad and crying while thinking about the injustice done to his sons. Vyasji said to him privately. 1-3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)