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mahabharat 6.19.7: हे राजनश्रेष्ठ! यह लो, मैं तुम्हारे लिए अविचल और अजेय वज्रव्यूह की रचना कर रहा हूँ, जिसका आविष्कार वज्रधारी इन्द्र ने किया है।   |   mahabharat अध्याय 6.19: व्यूहनिर्माणके विषयमें युधिष्ठिर और अर्जुनकी बातचीत, अर्जुनद्वारा वज्रव्यूहकी रचना, भीमसेनकी अध्यक्षतामें सेनाका आगे बढ़ना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 19: व्यूहनिर्माणके विषयमें युधिष्ठिर और अर्जुनकी बातचीत, अर्जुनद्वारा वज्रव्यूहकी रचना, भीमसेनकी अध्यक्षतामें सेनाका आगे बढ़ना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  6.19.7 
एष व्यूहामि ते व्यूहं राजसत्तम दुर्जयम्।
अचलं नाम वज्राख्यं विहितं वज्रपाणिना॥ ७॥
 
 
अनुवाद
हे राजनश्रेष्ठ! यह लो, मैं तुम्हारे लिए अविचल और अजेय वज्रव्यूह की रचना कर रहा हूँ, जिसका आविष्कार वज्रधारी इन्द्र ने किया है।
 
O best of kings! Take this, I am creating for you the unshakable and invincible Vajravyuha, which has been invented by the thunderbolt-wielding Indra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)