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mahabharat 6.19.4: पिताश्री! महर्षि बृहस्पति के वचनों से यह ज्ञात होता है कि यदि शत्रु की सेना छोटी हो, तो अपनी सेना को छोटे आकार में संगठित करके युद्ध करना चाहिए। और यदि अधिक सैनिकों के साथ युद्ध करना पड़े, तो अपनी सेना को इच्छानुसार फैला देना चाहिए।॥4॥   |   mahabharat अध्याय 6.19: व्यूहनिर्माणके विषयमें युधिष्ठिर और अर्जुनकी बातचीत, अर्जुनद्वारा वज्रव्यूहकी रचना, भीमसेनकी अध्यक्षतामें सेनाका आगे बढ़ना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 19: व्यूहनिर्माणके विषयमें युधिष्ठिर और अर्जुनकी बातचीत, अर्जुनद्वारा वज्रव्यूहकी रचना, भीमसेनकी अध्यक्षतामें सेनाका आगे बढ़ना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  6.19.4 
महर्षेर्वचनात् तात वेदयन्ति बृहस्पते:।
संहतान् योधयेदल्पान् कामं विस्तारयेद् बहून्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
पिताश्री! महर्षि बृहस्पति के वचनों से यह ज्ञात होता है कि यदि शत्रु की सेना छोटी हो, तो अपनी सेना को छोटे आकार में संगठित करके युद्ध करना चाहिए। और यदि अधिक सैनिकों के साथ युद्ध करना पड़े, तो अपनी सेना को इच्छानुसार फैला देना चाहिए।॥4॥
 
Father! It is understood from the words of Maharishi Brihaspati that if the enemy's army is small, then you should organize your army in a small size and fight the war. And if you have to fight with a larger number of soldiers, then you should spread your army according to your wish.॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)