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mahabharat 6.19.38: वहाँ, चारों ओर तेज़ हवा चल रही थी, रेत और कंकड़ बरसा रही थी। उस समय इतनी धूल उड़ रही थी कि संसार अंधकार से ढक गया। 38.   |   mahabharat अध्याय 6.19: व्यूहनिर्माणके विषयमें युधिष्ठिर और अर्जुनकी बातचीत, अर्जुनद्वारा वज्रव्यूहकी रचना, भीमसेनकी अध्यक्षतामें सेनाका आगे बढ़ना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 19: व्यूहनिर्माणके विषयमें युधिष्ठिर और अर्जुनकी बातचीत, अर्जुनद्वारा वज्रव्यूहकी रचना, भीमसेनकी अध्यक्षतामें सेनाका आगे बढ़ना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  6.19.38 
विष्वग्वाताश्च विववुर्नीचै: शर्करकर्षिण:।
रजश्चोद्‍धूयत महत् तम आच्छादयज्जगत्॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
वहाँ, चारों ओर तेज़ हवा चल रही थी, रेत और कंकड़ बरसा रही थी। उस समय इतनी धूल उड़ रही थी कि संसार अंधकार से ढक गया। 38.
 
There, a strong wind was blowing everywhere, showering sand and pebbles. At that time, so much dust flew that the world was covered in darkness. 38.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)