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mahabharat 6.19.37: सूर्योदय के समय जब सभी सैनिक संध्या उपासना कर रहे थे, तब बिना बादलों के भी जल की बूँदों वाली हवा चलने लगी। साथ ही बादलों की गर्जना की ध्वनि भी होने लगी ॥37॥   |   mahabharat अध्याय 6.19: व्यूहनिर्माणके विषयमें युधिष्ठिर और अर्जुनकी बातचीत, अर्जुनद्वारा वज्रव्यूहकी रचना, भीमसेनकी अध्यक्षतामें सेनाका आगे बढ़ना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.19.37 
संध्यां तिष्ठत्सु सैन्येषु सूर्यस्योदयनं प्रति।
प्रावात् सपृषतो वायुर्निरभ्रे स्तनयित्नुमान्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
सूर्योदय के समय जब सभी सैनिक संध्या उपासना कर रहे थे, तब बिना बादलों के भी जल की बूँदों वाली हवा चलने लगी। साथ ही बादलों की गर्जना की ध्वनि भी होने लगी ॥37॥
 
At sunrise, when all the soldiers were performing Sandhya Upasana, the wind started blowing with water droplets even without any clouds. It was accompanied by the roaring sound of clouds. ॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)