श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 19: व्यूहनिर्माणके विषयमें युधिष्ठिर और अर्जुनकी बातचीत, अर्जुनद्वारा वज्रव्यूहकी रचना, भीमसेनकी अध्यक्षतामें सेनाका आगे बढ़ना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  6.19.35 
वज्रो नामैष स व्यूहो निर्भय: सर्वतोमुख:।
चापविद्युद्‍ध्वजो घोरो गुप्तो गाण्डीवधन्वना॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
यह वज्र सेना पूरी तरह से निर्भय थी और इसके चारों ओर मुख थे। इसकी ध्वजा के पास स्वर्ण-मंडित धनुष बिजली की तरह चमक रहा था। उस भयानक सेना की रक्षा केवल गांडीवधारी अर्जुन ही कर रहा था।
 
This Vajra formation was absolutely fearless and had faces on all sides. The golden-decorated bow near its flag shone like lightning. That fearsome formation was protected only by Arjuna, the bearer of Gandiva.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)