Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.19.1-2: धृतराष्ट्र बोले- संजय! मेरी ग्यारह अक्षौहिणी सेना को पंक्तिबद्ध खड़ा देखकर पाण्डवपुत्र युधिष्ठिर ने अपनी छोटी सेना लेकर उनका सामना करने के लिए किस प्रकार पंक्तिबद्ध होकर युद्ध किया? मनुष्य, देवता, गन्धर्व और राक्षसों की व्यूह रचना की विधि जानने वाले भीष्मजी के सामने कुन्तीपुत्र ने अपनी सेना की पंक्तिबद्ध होकर युद्ध कैसे किया?॥1-2॥ | mahabharat अध्याय 6.19: व्यूहनिर्माणके विषयमें युधिष्ठिर और अर्जुनकी बातचीत, अर्जुनद्वारा वज्रव्यूहकी रचना, भीमसेनकी अध्यक्षतामें सेनाका आगे बढ़ना । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
धृतराष्ट्र उवाच
अक्षौहिण्यो दशैका च व्यूढा दृष्ट्वा युधिष्ठिर:।
कथमल्पेन सैन्येन प्रत्यव्यूहत पाण्डव:॥ १॥
यो वेद मानुषं व्यूहं दैवं गान्धर्वमासुरम्।
कथं भीष्मं स कौन्तेय: प्रत्यव्यूहत संजय॥ २॥
अनुवाद
धृतराष्ट्र बोले- संजय! मेरी ग्यारह अक्षौहिणी सेना को पंक्तिबद्ध खड़ा देखकर पाण्डवपुत्र युधिष्ठिर ने अपनी छोटी सेना लेकर उनका सामना करने के लिए किस प्रकार पंक्तिबद्ध होकर युद्ध किया? मनुष्य, देवता, गन्धर्व और राक्षसों की व्यूह रचना की विधि जानने वाले भीष्मजी के सामने कुन्तीपुत्र ने अपनी सेना की पंक्तिबद्ध होकर युद्ध कैसे किया?॥1-2॥
Dhritarashtra said— Sanjay! Seeing my eleven Akshauhinis standing in formation, how did Pandava's son Yudhishthira form a formation with his small army to face them? How did Kunti's son form a formation of his army in front of Bhishmaji who knows the method of formation of formations of humans, gods, Gandharvas and demons?॥1-2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥