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mahabharat 6.18.5: उस रणभूमि में सुवर्ण से विभूषित रथ और हाथी बिजली से युक्त बादलों के समान शोभायमान हो रहे थे॥5॥   |   mahabharat अध्याय 6.18: कौरवसेनाका कोलाहल तथा भीष्मके रक्षकोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 18: कौरवसेनाका कोलाहल तथा भीष्मके रक्षकोंका वर्णन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  6.18.5 
तत्र नागा रथाश्चैव जाम्बूनदविभूषिता:।
भ्राजमाना व्यदृश्यन्त मेघा इव सविद्युत:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
उस रणभूमि में सुवर्ण से विभूषित रथ और हाथी बिजली से युक्त बादलों के समान शोभायमान हो रहे थे॥5॥
 
In that battle-field, chariots and elephants adorned with gold looked as beautiful as clouds filled with lightning. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)