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mahabharat 6.18.12-14: अभिषह, शूरसेन, शिबि, वसति, शाल्व, मत्स्य, अम्बष्ठ, त्रिगर्त, केकय, सौवीर, कैटव तथा पूर्व, पश्चिम और उत्तर प्रदेश के निवासी - इन बारह जनपदों के सभी योद्धा अपने शरीर त्यागने को तत्पर होकर विशाल रथसमूह द्वारा पितामह भीष्म की रक्षा कर रहे थे ॥12-14॥   |   mahabharat अध्याय 6.18: कौरवसेनाका कोलाहल तथा भीष्मके रक्षकोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 18: कौरवसेनाका कोलाहल तथा भीष्मके रक्षकोंका वर्णन  »  श्लोक 12-14
 
 
श्लोक  6.18.12-14 
अभीषाहा: शूरसेना: शिबयोऽथ वसातय:॥ १२॥
शाल्वा मत्स्यास्तथाम्बष्ठास्त्रैगर्ता: केकयास्तथा।
सौवीरा: कैतवा: प्राच्या: प्रतीच्योदीच्यवासिन:॥ १३॥
द्वादशैते जनपदा: सर्वे शूरास्तनुत्यज:।
महता रथवंशेन ते ररक्षु: पितामहम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
अभिषह, शूरसेन, शिबि, वसति, शाल्व, मत्स्य, अम्बष्ठ, त्रिगर्त, केकय, सौवीर, कैटव तथा पूर्व, पश्चिम और उत्तर प्रदेश के निवासी - इन बारह जनपदों के सभी योद्धा अपने शरीर त्यागने को तत्पर होकर विशाल रथसमूह द्वारा पितामह भीष्म की रक्षा कर रहे थे ॥12-14॥
 
Abhishah, Shurasena, Shibi, Vasati, Shalva, Matsya, Ambashtha, Trigarta, Kekaya, Sauveer, Kaitava and the residents of East, West and Uttar Pradesh - all the warriors of these twelve districts, ready to sacrifice their bodies, were protecting Grandfather Bhishma with a huge chariot group. 12-14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)