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mahabharat 6.18.1: संजय कहते हैं - महाराज ! तत्पश्चात् दो घण्टे के अन्दर युद्ध की इच्छा रखने वाले योद्धाओं का भयंकर कोलाहल सुनाई देने लगा, जो हृदय को दहला देने के लिए पर्याप्त था ॥1॥   |   mahabharat अध्याय 6.18: कौरवसेनाका कोलाहल तथा भीष्मके रक्षकोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 18: कौरवसेनाका कोलाहल तथा भीष्मके रक्षकोंका वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  6.18.1 
संजय उवाच
ततो मुहूर्तात् तुमुल: शब्दो हृदयकम्पन:।
अश्रूयत महाराज योधानां प्रयुयुत्सताम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - महाराज ! तत्पश्चात् दो घण्टे के अन्दर युद्ध की इच्छा रखने वाले योद्धाओं का भयंकर कोलाहल सुनाई देने लगा, जो हृदय को दहला देने के लिए पर्याप्त था ॥1॥
 
Sanjaya says - Maharaj! Thereafter, within two hours, the terrifying noise of the warriors wishing to fight started to be heard, which was enough to shake the heart.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)