Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.17.4: सब दिशाओं में जलने की ध्वनि हो रही थी और मांस और रक्त पर पलने वाले गीदड़ और कौए मनुष्यों और पशुओं के शवों को तृष्णा से खा रहे थे और अशुभ शब्द कर रहे थे॥4॥ | mahabharat अध्याय 6.17: कौरवमहारथियोंका युद्धके लिये आगे बढ़ना तथा उनके व्यूह, वाहन और ध्वज आदिका वर्णन । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ववाशिरे च दीप्तायां दिशि गोमायुवायसा:।
लिप्समाना: शरीराणि मांसशोणितभोजना:॥ ४॥
अनुवाद
सब दिशाओं में जलने की ध्वनि हो रही थी और मांस और रक्त पर पलने वाले गीदड़ और कौए मनुष्यों और पशुओं के शवों को तृष्णा से खा रहे थे और अशुभ शब्द कर रहे थे॥4॥
There was a burning sound in all directions and the jackals and crows, who feed on flesh and blood, were craving the corpses of men and animals and were making ominous sounds. ॥4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥