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mahabharat 6.17.36-37: इसी प्रकार, राजा भगदत्त भी एक विशाल हाथी पर सवार होकर युद्ध के लिए आगे बढ़े, और वज्रधारी इन्द्र के समान अपनी प्रभा से चमक रहे थे। अवन्ति के राजकुमार विन्द और अनुविन्द भी भगदत्त के समान ही तेजस्वी थे। दोनों भाई हाथी की पीठ पर सवार होकर केतुमान के पीछे-पीछे चल रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 6.17: कौरवमहारथियोंका युद्धके लिये आगे बढ़ना तथा उनके व्यूह, वाहन और ध्वज आदिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 17: कौरवमहारथियोंका युद्धके लिये आगे बढ़ना तथा उनके व्यूह, वाहन और ध्वज आदिका वर्णन  »  श्लोक 36-37
 
 
श्लोक  6.17.36-37 
तेजसा दीप्यमानस्तु वारणोत्तममास्थित:।
भगदत्तो ययौ राजा यथा वज्रधरस्तथा॥ ३६॥
गजस्कन्धगतावास्तां भगदत्तेन सम्मितौ।
विन्दानुविन्दावावन्त्यौ केतुमन्तमनुव्रतौ॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार, राजा भगदत्त भी एक विशाल हाथी पर सवार होकर युद्ध के लिए आगे बढ़े, और वज्रधारी इन्द्र के समान अपनी प्रभा से चमक रहे थे। अवन्ति के राजकुमार विन्द और अनुविन्द भी भगदत्त के समान ही तेजस्वी थे। दोनों भाई हाथी की पीठ पर सवार होकर केतुमान के पीछे-पीछे चल रहे थे।
 
Similarly, King Bhagadatta, mounted on a great elephant, also went ahead for the battle, glowing with his brilliance like Indra wielding the thunderbolt. The princes of Avanti, Vind and Anuvind, were also as illustrious as Bhagadatta. Both the brothers were following Ketuman on the back of the elephant.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)