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mahabharat 6.17.34: राजा कलिंग के रथ की ध्वजा पर अग्नि का प्रतीक अंकित था। वह श्वेत छत्र, चँवर (हार) और कंठ-नाल के आकार के पंखे से सुसज्जित होकर अत्यंत सुंदर लग रहा था।   |   mahabharat अध्याय 6.17: कौरवमहारथियोंका युद्धके लिये आगे बढ़ना तथा उनके व्यूह, वाहन और ध्वज आदिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.17.34 
शुशुभे केतुमुख्येन पावकेन कलिङ्गक:।
श्वेतच्छत्रेण निष्केण चामरव्यजनेन च॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
राजा कलिंग के रथ की ध्वजा पर अग्नि का प्रतीक अंकित था। वह श्वेत छत्र, चँवर (हार) और कंठ-नाल के आकार के पंखे से सुसज्जित होकर अत्यंत सुंदर लग रहा था।
 
The flag of the chariot of King Kalinga had the symbol of fire on it. It looked very beautiful decorated with a white umbrella and a fan in the form of a chavar (a necklace) and a medal (kantha-naal).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)